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जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं।

सदियों से सोए हुए थे वीराने में आज जागे, नींद हराम करते हैं। जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं। उम्र है लड़ने झगड़ने की शांति से क्यों पड़े रहे? जवान है हम, चलो बवाल करते हैं। जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं। जो दुनिया कहें क्या वहीं सच हैं? क्यों मानले? चलो सवाल करते हैं। जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं। पाप और नाइंसाफ़ी क्यों सहे? आओ लड़े, विरोध में हड़ताल करते हैं। जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं। कम में क्यों खुश हो? जब आकाश सीमा है तो सपनें विशाल करते है। जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं। चले थे आसमान मुट्ठी में थामने जहां पहुंचे भौकाल करते हैं। जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं। चाहत थी दुनिया जीतने की ना जीत पाए, मलाल करते हैं। जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं। अब भूल चुके है खुद का अस्तित्व “कौन हूँ मैं?”- खुद से ये सवाल करते हैं। जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं।

“जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं और हम कमाल करने के लिये ही बने हैं |”

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